चित्रकूट विधानसभा के रजौला ग्राम की सरकारी आराजी भूमाफियाओं नें हड़पा

Action Vichar News मध्य प्रदेश सतना

.बीते 8 माह से जांच के नाम पर फाइल एसडीएम कार्यालय में पड़ी धूल खा रही है।

सतना – मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पावन कर्मस्थली पवित्र नगरी चित्रकूट धाम,जो त्याग और तपस्या की भूमि है यहां राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों की मिली भगत से भूमाफियों द्वारा ऐसे ऐसे कारनामों को अंजाम दिया गया है जिसे सुनकर ही पसीना आ जाता है। चित्रकूट में भूमाफियों द्वारा गौ वंशों को चारा खाने के लिए शासन द्वारा आरक्षित जमीन को भी राजस्व अधिकारियों, कर्मचारियों से मिली भगत करके हड़प लिया गया है। पटवारी हल्का रजौला की आराजी नंबर 200 सन् 1958/59 में जिसका कुल रकबा 8.43 एकड़ था सरकारी चारागाह के रूप में दर्ज थी। उक्त आराजी सन् 1978/79 तक तीन भागों में विभक्त होने के बावजूद सरकारी दर्ज थी। जिसमें 200/1 कुल रकबा 6.43 में सरकारी चारोखर एवं सड़क (3)2.601 हे.और 200/2 रकबा 2.00 सरकारी बंजर 0.809 हे.दर्ज थी, लेकिन इसके बाद उक्त आराजी सन् 1979/80 से बिना किसी वैध आदेश के बंदरबांट होनी शुरु हो गई और वर्तमान में इस सरकारी चारागाह आराजी में 14 लोगों के नाम दर्ज हो गए।बीते वर्ष प्रिंट मीडिया और शोशल मीडिया में चली खबरों के बाद राजस्व अमले की नींद टूटी और 31.12.2024 को तत्कालीन नायब तहसीलदार चित्रकूट द्वारा पटवारी प्रतिवेदन के आधार पर कार्यवाही हेतु फाइल एसडीएम मझगवां को भेज दी गई। तब से लेकर आज तक लगभग 7 महीने का समय व्यतीत हो गया लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई और एसडीएम कार्यालय मझगवां पड़े पड़े फाइल धूल खा रही है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि क्या चित्रकूट में इसी तरह सरकारी जमीनों की बंदरबांट होती रहेगी और क्या सतना जिला कलेक्टर इस जमीन को पुनः सरकारी चारागाह के रूप में दर्ज करवा पाएंगे?

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